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राजस्थान में 24 घंटे के लिए प्राइवेट रहेंगे हॉस्पिटल बंद! इमरजेंसी सेवाएं भी रहेंगी ठप

अबतक इंडिया न्यूज 13 अप्रैल जयपुर । राजस्थान में निजी चिकित्सा सेवाओं को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान ने राज्यभर में 24 घंटे के लिए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को बंद रखने का ऐलान किया है. यह कदम जयपुर के निविक अस्पताल के निदेशक डॉ. सोन देव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में उठाया गया है.

 

आईएमए के पदाधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी है, जिसमें किसी भी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई थी. इसके बावजूद आरजीएचएस योजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आधार पर डॉक्टर की गिरफ्तारी को संगठन ने अनुचित बताया है. आईएमए का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पूरे चिकित्सा समुदाय में असंतोष और डर का माहौल पैदा हो गया है.

आईएमए राजस्थान के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया कि राज्यभर के डॉक्टर इस कार्रवाई से बेहद आक्रोशित हैं. वहीं संगठन के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और सचिव डॉ. एन.के. अग्रवाल ने कहा कि यह कदम चिकित्सा पेशे की गरिमा के खिलाफ है. उनका कहना है कि डॉक्टरों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से उनके मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ता है और मरीजों की सेवा भी प्रभावित होती है.

इसी विरोध के चलते 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से 15 अप्रैल सुबह 8 बजे तक पूरे राजस्थान में निजी चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी. इस दौरान निजी अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल सेवाएं प्रभावित रहेंगी. आपातकालीन सेवाएं भी इस अवधि में सीमित रूप से प्रभावित हो सकती हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

 

हालांकि इस बंद में सरकारी डॉक्टर शामिल नहीं होंगे. वे अपनी सेवाएं जारी रखेंगे ताकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज बाधित न हो. लेकिन सरकारी चिकित्सक भी अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर इस मुद्दे के प्रति अपनी नाराजगी जताएंगे.

 

इसके साथ ही आईएमए ने आरजीएचएस योजना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि इस योजना में भुगतान में देरी, अनावश्यक पेनल्टी और जटिल प्रक्रियाओं जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं. इन्हीं कारणों से राज्यभर में आरजीएचएस सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की भी घोषणा की गई है. यह विवाद अब केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर डालता दिख रहा है.

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